बढ़ते अपराध ने फिर से जंगल राज की याद दिलाई है । अपराधी बेख़ौफ़ घूम रमे है । जब चाहे , जिसे चाहे मर दिया जा रहा है । ऐसा लग रहा है की इस मानसून बिहार बाढ़ से पहले अपराध की चपेट में है । जिसे कोई रोकने वाला कोई नहीं है न सरकार न पुलिस प्रशाशन । इस बिच चन्दन मिश्रा का पारष अस्पताल में मर्डर के बाद बिहार के ADG का कहना है की किसान के पास काम नहीं तभी क्राइम बढ़ा है । इस तरह के भड़काऊ बयान दे रहे है वो व्यक्ति जिसके हाथ में बिहार की सुरक्षा व्यवस्था दी गई है ।
सिर्फ जुलाई में 50 से अधिक हत्याएं !
बिहार में सिर्फ इस महीने मतलब जुलाई में 50 से अधिक हत्याएं हो चुकी है । और ADG कुंदन कृषणन का कहना है NCRB का आंकड़ा यह दिखाता है की इस साल बिहार में पिछले साल के मुकाबले कम अपराध है । पुलिस प्रशाशन को अपराध कम कैसे करे और अपराधियों को पकड़ना चाहिए लेकिन नहीं वो तो किसानो को ही अपराधी बना दिए ।
कितनी हत्याएं कहाँ हुई ?
आपको विभिन्न मीडिया रिपोर्ट से मिले कुछ आकड़ें दिखाता हूँ जिससे आपको एक अंदाजा लग जायेगा की अपराध कैसे बेलगाम हो गए है बिहार में ।
3 जुलाई को मधेपुरा के मुरलीगंज में सब्जी विक्रेता दिनेश दास और उनकी पत्नी भलिया देवी की जमीनी विवाद में हत्या हो गई ।
4 जुलाई को पटना के बारे कारोबारी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या , सिवान में आपसी विवाद में 3 लोगो की धारदार हथियार से हत्या , समस्तीपुर में पंचायत समिति सदस्य मंजू देवी के पति सुरेश महतो को गोली मार दी गई , बेगूसराय में स्वर्ण कारोबारी ही हत्या ।
5 जुलाई को अररिया में गोली मार कर हत्या ।
6 जुलाई को दानापुर में प्राइवेट स्कूल संचालक अजित कुमार की गोली मार कर हत्या , पूर्णिया में लोगो ने डायन का आरोप लगाकर एक ही परिवार के 5 लोगो की हत्या कर दी , नालंदा में दो लोगो को गोली मार दी , बेतिया में हत्या , मुजफ्फरपुर में मुमताज अहमद की गाला रेतकर हत्या ।
7 जुलाई को मधुबनी में बद्री यादव , वैशाली में सुरेंद्र झा को गोली मार कर हत्या ।
8 जुलाई को भागलपुर के मोहम्मद सद्दाम की चाकू गोदकर हत्या , नवगछिया में साजन कुमार को गोली मारी , नवादा में तलवार से हत्या ।
10 जुलाई को पटना के बालू कारोबारी रमाकांत यादव जहानाबाद में शिवनंदन को गोली मारकर हत्या , समस्तीपुर में बुजुर्ग महिला को परोधियो ने पिट पिट कर मार डाला ।
11 जुलाई को पटना में विक्रम झा , मुजफ्फरपुर में व्यापारी और वेटनरी कॉलेज में छात्र की हत्या हो गई ।
12 जुलाई को गया में 14 साल की बेटी , नालंदा में एक महिला की हत्या हुई ।
13 जुलाई को पटना में एक वकील , सीतामढ़ी में एक व्यापारी और छपरा में शिक्षक की हत्या हुई ।
14 जुलाई को बेगुसराए और खगरिया में हत्या हुई ।
15 जुलाई को नवादा में हत्या ।
चन्दन मिश्रा पर पुलिस का बयान
चन्दन मिश्रा की हत्या पर पुलिस प्रशाशन के अधिकारी कहते है की वो तो बहुत बड़ा अपराधी था मारा गया । उसपर कई मुक़दमे चल रहे थे । सवाल ये नहीं की चन्दन मिश्रा मारा गया क्योकि वो अपराधी था सवाल ये है उसे खुलेआम 5 लोग अस्पताल में बिना मास्क के पिस्टल लेकर घुसते है और गोली मारकर निकल भी जाते है लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाया । अपराधी उतना बेख़ौफ़ है कोई डर नहीं है । आखिर अपराधी डर क्यों नहीं रहे ।
क्या इसी बिहार की आप सपना देख रहे है
अब सवाल उठ रहे है की सभी सरकार एक दूसरे पे आरोप प्रत्यारोप लगते रहते है की पहले जंगल राज था अब सुशाशन है । क्या यही सुशाशन है । इस बिहार की कामना तो कोई भी नहीं करता । उम्मीद है चुनाव नजदीक है , सरकार इस घटनाओ पर पुलिस प्रशाशन पर करे निर्देश दे और अपराध रोकने की कोई रणनीति तैयार करे ।
डिस्क्लेमर : ये सभी आंकड़े विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म से जुटाई गई है , आप खुद से इस आंकड़ों को वेरिफाई कर सकते है ।